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mahabharat 9.64.14-15h: अधर्म पर विजय पाकर कौन बुद्धिमान पुरुष सुखी होगा? जैसा पापी पाण्डवपुत्र भीमसेन को हो रहा है॥14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.64: दुर्योधनका संजयके सम्मुख विलाप और वाहकोंद्वारा अपने साथियोंको संदेश भेजना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 64: दुर्योधनका संजयके सम्मुख विलाप और वाहकोंद्वारा अपने साथियोंको संदेश भेजना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  9.64.14-15h 
अधर्मेण जयं लब्ध्वा को नु हृष्येत पण्डित:॥ १४॥
यथा संहृष्यते पाप: पाण्डुपुत्रो वृकोदर:।
 
 
अनुवाद
अधर्म पर विजय पाकर कौन बुद्धिमान पुरुष सुखी होगा? जैसा पापी पाण्डवपुत्र भीमसेन को हो रहा है॥14 1/2॥
 
‘Which wise man will be happy after achieving victory over unrighteousness? As is happening to the sinful Pandava son Bhimasena.॥ 14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)