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mahabharat 9.63.8-9: हे राजन! हे भरतवंशी नरेश! भीमसेन ने युद्ध की मर्यादा का उल्लंघन करके धृतराष्ट्रपुत्र महाबली दुर्योधन को मार डाला है। वह गदायुद्ध द्वारा मारा गया है। यह सब देखकर युधिष्ठिर का मन महान भय से भर गया।   |   mahabharat अध्याय 9.63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  9.63.8-9 
हतं दुर्योधनं दृष्ट्वा भीमसेनेन संयुगे।
व्युत्क्रम्य समयं राजन् धार्तराष्ट्रं महाबलम्॥ ८॥
अन्यायेन हतं दृष्ट्वा गदायुद्धेन भारत।
युधिष्ठिरं महाराज महद् भयमथाविशत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! हे भरतवंशी नरेश! भीमसेन ने युद्ध की मर्यादा का उल्लंघन करके धृतराष्ट्रपुत्र महाबली दुर्योधन को मार डाला है। वह गदायुद्ध द्वारा मारा गया है। यह सब देखकर युधिष्ठिर का मन महान भय से भर गया।
 
O King! O King of the Bharat dynasty! Bhimasena has killed the mighty Duryodhana, son of Dhritarashtra, by violating the rules of war. He has been killed by a mace fight. On seeing all these things, Yudhishthira's mind was filled with great fear. 8-9.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)