श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  9.63.78 
आगम्य शिबिरं रात्रौ सोऽभ्यगच्छत पाण्डवान्।
तच्च तेभ्य: समाख्याय सहितस्तै: समाहित:॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
रात्रि में शिविर में आकर वह पाण्डवों से मिला और उन्हें सारा वृत्तान्त सुनाकर सावधानी से उनके पास रुक गया।
 
Coming to the camp at night he met the Pandavas and after telling them the whole story he stayed with them cautiously.
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि धृतराष्ट्रगान्धारीसमाश्वासने त्रिषष्टितमोऽध्याय:॥ ६३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें धृतराष्ट्र और गान्धारीका श्रीकृष्णको आश्वासन देनाविषयक तिरसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६३॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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