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श्लोक 9.63.74-75  |
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं गान्धार्या सहितोऽब्रवीत्।
धृतराष्ट्रो महाबाहु: केशवं केशिसूदनम्॥ ७४॥
शीघ्रं गच्छ महाबाहो पाण्डवान् परिपालय।
भूयस्त्वया समेष्यामि क्षिप्रमेव जनार्दन॥ ७५॥ |
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| अनुवाद |
| यह सुनकर गांधारी सहित पराक्रमी धृतराष्ट्र ने केशवधक केशव से कहा, 'पराक्रमी जनार्दन! आप शीघ्र जाकर पाण्डवों की रक्षा कीजिए। मैं शीघ्र ही आपसे पुनः मिलूँगा।' |
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| Hearing this, the powerful Dhritarashtra along with Gandhari said to Kesava, the killer of Kesha, 'Powerful Janardan! You go quickly and protect the Pandavas. I will meet you again soon.' |
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