श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 70-71h
 
 
श्लोक  9.63.70-71h 
समाश्वास्य च गान्धारीं धृतराष्ट्रं च माधव:॥ ७०॥
द्रौणिसंकल्पितं भावमवबुद्धॺत केशव:।
 
 
अनुवाद
माधव श्रीकृष्ण ने गांधारी और धृतराष्ट्र को सान्त्वना दी और अश्वत्थामा के मन में हुए उस भयंकर संकल्प का स्मरण कराया ॥70 1/2॥
 
Madhav Shri Krishna consoled Gandhari and Dhritarashtra and remembered the terrible resolution that had taken place in the mind of Ashwatthama. 70 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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