श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  9.63.7 
वैशम्पायन उवाच
त्वद्युक्तोऽयमनुप्रश्नो यन्मां पृच्छसि पार्थिव।
तत्तेऽहं सम्प्रवक्ष्यामि यथावद् भरतर्षभ॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन बोले, "हे भरतवंशी राजा! आपने जो प्रश्न पूछा है, वह सर्वथा सत्य है। आप मुझसे जो कुछ पूछ रहे हैं, मैं आपको सत्य ही बताऊँगा।"
 
Vaishampayana said, "O King of Bharat's clan! The question you have asked is absolutely correct. Whatever you are asking me, I will tell you the truth."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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