Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.63.68-69h: यह कहकर गांधारी देवी ने पुत्र के वियोग में शोकग्रस्त होकर अपना मुख पल्लू से ढक लिया और फूट-फूटकर रोने लगीं।   |   mahabharat अध्याय 9.63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 68-69h
 
 
श्लोक  9.63.68-69h 
एतावदुक्त्वा वचनं मुखं प्रच्छाद्य वाससा॥ ६८॥
पुत्रशोकाभिसंतप्ता गान्धारी प्ररुरोद ह।
 
 
अनुवाद
यह कहकर गांधारी देवी ने पुत्र के वियोग में शोकग्रस्त होकर अपना मुख पल्लू से ढक लिया और फूट-फूटकर रोने लगीं।
 
Having said this, Gandhari Devi, grief-stricken for the loss of her son, covered her face with her pallu and began to cry profusely. 68 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)