Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.63.65-67h: भगवान श्रीकृष्ण के ये वचन सुनकर गांधारी बोली, 'महाबाहु केशव! आप जो कह रहे हैं, वह बिलकुल ठीक है। अब तक मेरे मन में बहुत-से दुःख थे और उन दुःखों की अग्नि से जलकर मेरा मन व्याकुल हो गया था (अतः मैं पाण्डवों के दुष्परिणामों का चिन्तन करने लगी थी); किन्तु जनार्दन! अब आपकी बात सुनकर मेरा मन स्थिर हो गया है - क्रोध का वेग शान्त हो गया है। | mahabharat अध्याय 9.63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भगवान श्रीकृष्ण के ये वचन सुनकर गांधारी बोली, 'महाबाहु केशव! आप जो कह रहे हैं, वह बिलकुल ठीक है। अब तक मेरे मन में बहुत-से दुःख थे और उन दुःखों की अग्नि से जलकर मेरा मन व्याकुल हो गया था (अतः मैं पाण्डवों के दुष्परिणामों का चिन्तन करने लगी थी); किन्तु जनार्दन! अब आपकी बात सुनकर मेरा मन स्थिर हो गया है - क्रोध का वेग शान्त हो गया है।
Hearing these words of Lord Krishna, Gandhari said, 'Mahabahu Keshav! What you are saying is absolutely correct. Till now, I had a lot of sorrows in my mind and being burnt by the fire of those sorrows, my mind had become disturbed (so I started thinking about the ill-effects of the Pandavas); but Janardan! Now, after listening to you, my mind has become stable - the fury of anger has subsided.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥