Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.63.64-65h: पाण्डवों के विनाश का विचार भी आपके मन में न आए। महाभागे! आप अपनी तपस्या के बल से अपनी क्रोध भरी दृष्टि से सम्पूर्ण पृथ्वी को उसके प्राणियों सहित नष्ट करने की शक्ति रखते हैं। 64 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पाण्डवानां विनाशाय मा ते बुद्धि: कदाचन।
शक्ता चासि महाभागे पृथिवीं सचराचराम्॥ ६४॥
चक्षुषा क्रोधदीप्तेन निर्दग्धुं तपसो बलात्।
अनुवाद
पाण्डवों के विनाश का विचार भी आपके मन में न आए। महाभागे! आप अपनी तपस्या के बल से अपनी क्रोध भरी दृष्टि से सम्पूर्ण पृथ्वी को उसके प्राणियों सहित नष्ट करने की शक्ति रखते हैं। 64 1/2॥
‘The thought of destruction of Pandavas should never come to your mind. Mahabhage! By the power of your penance, you have the power to destroy the entire earth along with its living creatures through your angry gaze. 64 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥