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mahabharat 9.63.62: आपने विजय चाहने वाले दुर्योधन को संबोधित करके उससे बहुत रूखेपन से कहा था कि 'हे मूर्ख! मेरी बात सुनो, जहाँ धर्म है, वहीं पक्ष विजय पाता है।'॥ 62॥   |   mahabharat अध्याय 9.63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  9.63.62 
दुर्योधनस्त्वया चोक्तो जयार्थी परुषं वच:।
शृणु मूढ वचो मह्यं यतो धर्मस्ततो जय:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
आपने विजय चाहने वाले दुर्योधन को संबोधित करके उससे बहुत रूखेपन से कहा था कि 'हे मूर्ख! मेरी बात सुनो, जहाँ धर्म है, वहीं पक्ष विजय पाता है।'॥ 62॥
 
You had addressed Duryodhana, who desired victory, and said to him very rudely, 'O fool! Listen to me, where there is Dharma, that side wins.'॥ 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)