श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 58-59h
 
 
श्लोक  9.63.58-59h 
एवमुक्त्वा महाराज धृतराष्ट्रं यदूत्तम:॥ ५८॥
उवाच परमं वाक्यं गान्धारीं शोककर्शिताम्।
 
 
अनुवाद
महाराज! राजा धृतराष्ट्र से ऐसा कहकर यदुश्रेष्ठ श्रीकृष्ण ने शोक से दुर्बल हो चुकी देवी गांधारी से यह शुभ वचन कहे - ॥58 1/2॥
 
Maharaj! After saying this to King Dhritarashtra, the best of the Yadus, Sri Krishna, spoke these auspicious words to Goddess Gandhari, who had become weak with grief - ॥ 58 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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