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mahabharat 9.63.55-56h: वे अपने अपराधी शत्रुओं को मारकर दिन-रात शोक की अग्नि में जलते रहते हैं, उन्हें कभी शांति नहीं मिलती ॥55 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 55-56h
 
 
श्लोक  9.63.55-56h 
एतच्च कदनं कृत्वा शत्रूणामपकारिणाम्॥ ५५॥
दह्यते स दिवा रात्रौ न च शर्माधिगच्छति।
 
 
अनुवाद
वे अपने अपराधी शत्रुओं को मारकर दिन-रात शोक की अग्नि में जलते रहते हैं, उन्हें कभी शांति नहीं मिलती ॥55 1/2॥
 
Having killed their criminal enemies, they burn in the fire of grief day and night; they never find peace. ॥ 55 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)