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mahabharat 9.63.52-53h: कुरुप्रवर! पुरुषसिंह! आपको और प्रसिद्ध गांधारी देवी को पांडवों के बारे में कभी बुरा बोलने का विचार भी नहीं करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 9.63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  9.63.52-53h 
त्वं चैव कुरुशार्दूल गान्धारी च यशस्विनी॥ ५२॥
मा शुचो नरशार्दूल पाण्डवान् प्रति किल्बिषम्।
 
 
अनुवाद
कुरुप्रवर! पुरुषसिंह! आपको और प्रसिद्ध गांधारी देवी को पांडवों के बारे में कभी बुरा बोलने का विचार भी नहीं करना चाहिए।
 
Kurupravar! Purusha Singh! You and the famous Gandhari Devi should never think of speaking ill of the Pandavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)