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mahabharat 9.63.5: विप्रवर! मैं इसका कोई छोटा-सा कारण नहीं जानता, जिसके कारण भगवान जनार्दन को अमैथुनी योनि में मरना पड़ा॥5॥   |   mahabharat अध्याय 9.63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  9.63.5 
न चैतत् कारणं ब्रह्मन्नल्पं विप्रतिभाति मे।
यत्रागमदमेयात्मा स्वयमेव जनार्दन:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
विप्रवर! मैं इसका कोई छोटा-सा कारण नहीं जानता, जिसके कारण भगवान जनार्दन को अमैथुनी योनि में मरना पड़ा॥5॥
 
Vipravara! I don't know any small reason for this, due to which Lord Janardan had to die in the form of immeasurable form. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)