Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.63.49-50h: महाप्रज्ञ! कृपया पाण्डवों को दोष न दें। किन्तु धर्म, न्याय और स्नेह की दृष्टि से महापंडित पाण्डवों ने इसमें किंचितमात्र भी अपराध नहीं किया है। | mahabharat अध्याय 9.63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मा च दोषान् महाप्राज्ञ पाण्डवेषु निवेशय।
अल्पोऽप्यतिक्रमो नास्ति पाण्डवानां महात्मनाम्॥ ४९॥
धर्मतो न्यायतश्चैव स्नेहतश्च परंतप।
अनुवाद
महाप्रज्ञ! कृपया पाण्डवों को दोष न दें। किन्तु धर्म, न्याय और स्नेह की दृष्टि से महापंडित पाण्डवों ने इसमें किंचितमात्र भी अपराध नहीं किया है।
‘Mahapragya! Please do not blame the Pandavas. But from the viewpoint of religion, justice and affection, the great Pandavas have not committed even the slightest crime in this. 49 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥