Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.63.46-47h: भीष्म, सोमदत्त, बाह्लीक, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य, अश्वत्थामा और बुद्धिमान विदुरजी ने सदैव आपसे शांति की प्रार्थना की, परन्तु आपने ऐसा नहीं किया।   |   mahabharat अध्याय 9.63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  9.63.46-47h 
भीष्मेण सोमदत्तेन बाह्लीकेन कृपेण च।
द्रोणेन च सपुत्रेण विदुरेण च धीमता॥ ४६॥
याचितस्त्वं शमं नित्यं न च तत् कृतवानसि।
 
 
अनुवाद
भीष्म, सोमदत्त, बाह्लीक, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य, अश्वत्थामा और बुद्धिमान विदुरजी ने सदैव आपसे शांति की प्रार्थना की, परन्तु आपने ऐसा नहीं किया।
 
Bhishma, Somadatta, Bahlika, Kripacharya, Dronacharya, Ashwatthama and the wise Viduraji always pleaded with you for peace; but you did not do that.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)