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श्लोक 9.63.45  |
त्वया कालोपसृष्टेन लोभतो नापवर्जिता:।
तवापराधान्नृपते सर्वं क्षत्रं क्षयं गतम्॥ ४५॥ |
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| अनुवाद |
| परन्तु काल की प्रेरणा से तुमने लोभवश वे पाँच गाँव भी नहीं दिए। हे मनुष्यों के स्वामी! तुम्हारे अपराध के कारण समस्त क्षत्रिय नष्ट हो गए॥ 45॥ |
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| ‘But being inspired by Kaal, you did not give even those five villages out of greed. O Lord of men! Because of your crime all the Kshatriyas were destroyed.॥ 45॥ |
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