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mahabharat 9.63.45: परन्तु काल की प्रेरणा से तुमने लोभवश वे पाँच गाँव भी नहीं दिए। हे मनुष्यों के स्वामी! तुम्हारे अपराध के कारण समस्त क्षत्रिय नष्ट हो गए॥ 45॥   |   mahabharat अध्याय 9.63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  9.63.45 
त्वया कालोपसृष्टेन लोभतो नापवर्जिता:।
तवापराधान्नृपते सर्वं क्षत्रं क्षयं गतम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
परन्तु काल की प्रेरणा से तुमने लोभवश वे पाँच गाँव भी नहीं दिए। हे मनुष्यों के स्वामी! तुम्हारे अपराध के कारण समस्त क्षत्रिय नष्ट हो गए॥ 45॥
 
‘But being inspired by Kaal, you did not give even those five villages out of greed. O Lord of men! Because of your crime all the Kshatriyas were destroyed.॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)