श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  9.63.44 
मया च स्वयमागम्य युद्धकाल उपस्थिते।
सर्वलोकस्य सांनिध्ये ग्रामांस्त्वं पञ्च याचित:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जब युद्ध का अवसर आया, तब मैंने स्वयं आकर समस्त प्रजा के सामने शांति स्थापना के लिए आपसे केवल पाँच गाँव माँगे थे ॥44॥
 
When the occasion of war arose, I myself came and in front of all the people I asked you for only five villages in order to establish peace. ॥ 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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