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mahabharat 9.63.42: धर्मपरायण युधिष्ठिर ने भाइयों के साथ नियत समय की प्रतीक्षा करते हुए चुपचाप सब कष्ट सहन किए। पाण्डव शुद्ध भाव से आपके पास आए थे, फिर भी वे छलपूर्वक जुए में हार गए और निर्वासित कर दिए गए॥ 42॥   |   mahabharat अध्याय 9.63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  9.63.42 
भ्रातृभि: समयं कृत्वा क्षान्तवान् धर्मवत्सल:।
द्यूतच्छलजितै: शुद्धैर्वनवासो ह्युपागत:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
धर्मपरायण युधिष्ठिर ने भाइयों के साथ नियत समय की प्रतीक्षा करते हुए चुपचाप सब कष्ट सहन किए। पाण्डव शुद्ध भाव से आपके पास आए थे, फिर भी वे छलपूर्वक जुए में हार गए और निर्वासित कर दिए गए॥ 42॥
 
‘Yudhishthira, who loved Dharma, endured all the hardships silently while waiting for the appointed time with his brothers. The Pandavas had come to you with pure intentions, but even then they were deceitfully defeated in gambling and exiled.॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)