श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  9.63.41 
यतितं पाण्डवै: सर्वैस्तव चित्तानुरोधिभि:।
कथं कुलक्षयो न स्यात्तथा क्षत्रस्य भारत॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
भरत! समस्त पाण्डवों ने सदैव आपकी इच्छानुसार आचरण किया है। उन्होंने इस बात के लिए महान प्रयत्न किया है कि हमारा कुल और क्षत्रिय समाज नष्ट न हो॥ 41॥
 
Bharat! All the Pandavas have always behaved according to your wishes. They have made great efforts to ensure that our clan and the Kshatriya community are not destroyed.॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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