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श्लोक 9.63.31-32h  |
केशवस्य वच: श्रुत्वा त्वरमाणोऽथ दारुक:॥ ३१॥
न्यवेदयद् रथं सज्जं केशवाय महात्मने। |
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| अनुवाद |
| केशव का यह आदेश सुनकर दारुक ने शीघ्रता से रथ को सजाया और महात्मा को इसकी सूचना दी। |
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| On hearing this order from Keshava, Daruka hastily decorated the chariot and informed the great soul about it. |
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