श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  9.63.30-31h 
धर्मराजस्य वचनं श्रुत्वा यदुकुलोद्वह:॥ ३०॥
आमन्त्र्य दारुकं प्राह रथ: सज्जो विधीयताम्।
 
 
अनुवाद
धर्मराज के ये वचन सुनकर यदुकुलतिलक श्रीकृष्ण ने दारुक को बुलाकर कहा, 'रथ तैयार करो।'
 
On hearing these words of Dharmaraj, Yadukultilak Sri Krishna called Daruk and said, 'Prepare the chariot.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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