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mahabharat 9.63.29-30h: हमारे पितामह श्री कृष्णद्वैपायन भगवान व्यास भी वहाँ होंगे। महाबाहु! सात्वतवंश के श्रेष्ठ पुरुष! आप पाण्डवों के हितैषी हैं। आपको देवी गांधारी का क्रोध हर प्रकार से शांत करना चाहिए। 29 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  9.63.29-30h 
पितामहश्च भगवान् कृष्णस्तत्र भविष्यति।
सर्वथा ते महाबाहो गान्धार्या: क्रोधनाशनम्॥ २९॥
कर्तव्यं सात्वतां श्रेष्ठ पाण्डवानां हितार्थिना।
 
 
अनुवाद
हमारे पितामह श्री कृष्णद्वैपायन भगवान व्यास भी वहाँ होंगे। महाबाहु! सात्वतवंश के श्रेष्ठ पुरुष! आप पाण्डवों के हितैषी हैं। आपको देवी गांधारी का क्रोध हर प्रकार से शांत करना चाहिए। 29 1/2॥
 
Our grandfather Shri Krishnadvaipayan Lord Vyas will also be there. Great arms! The best man of Satvatvansh! You are well-wishers of Pandavas. You should appease the anger of Goddess Gandhari by all means. 29 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)