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mahabharat 9.63.27-28: महाबाहो! आप ही समस्त लोकों के रचयिता और संहारक हैं। आप ही सबकी उत्पत्ति और संहार के स्थान हैं। आप युक्ति और युक्ति से युक्त समयोचित वचनों से शीघ्र ही गांधारी देवी को प्रसन्न करेंगे। ॥27-28॥   |   mahabharat अध्याय 9.63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 27-28
 
 
श्लोक  9.63.27-28 
त्वं हि कर्ता विकर्ता च लोकानां प्रभवाप्यय:॥ २७॥
हेतुकारणसंयुक्तैर्वाक्यै: कालसमीरितै:।
क्षिप्रमेव महाबाहो गान्धारीं शमयिष्यसि॥ २८॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! आप ही समस्त लोकों के रचयिता और संहारक हैं। आप ही सबकी उत्पत्ति और संहार के स्थान हैं। आप युक्ति और युक्ति से युक्त समयोचित वचनों से शीघ्र ही गांधारी देवी को प्रसन्न करेंगे। ॥27-28॥
 
‘Mahabaho! You are the creator and destroyer of all the worlds. You are the place of origin and destruction of all. You will soon pacify Gandhari Devi with timely words combined with logic and reason. ॥27-28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)