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mahabharat 9.63.26-27h: हे शत्रुओं का नाश करने वाले माधव! मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि क्रोध से जलती हुई देवी गांधारी को शांत करने के लिए आपको इस समय वहाँ जाना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 9.63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  9.63.26-27h 
तत्र मे गमनं प्राप्तं रोचते तव माधव॥ २६॥
गान्धार्या: क्रोधदीप्ताया: प्रशमार्थमरिंदम।
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का नाश करने वाले माधव! मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि क्रोध से जलती हुई देवी गांधारी को शांत करने के लिए आपको इस समय वहाँ जाना चाहिए।
 
Madhava, the destroyer of enemies! It seems to me that you should go there at this time to pacify Goddess Gandhari who is burning with anger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)