Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.63.25-26h: वीर! अब मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि इन्हें प्रसन्न करने का कार्य ही उचित है। पुरुषोत्तम! आपके अतिरिक्त और कौन है जो पुत्रों के वियोग के शोक से दुर्बल होकर क्रोध से लाल नेत्रों वाली बैठी हुई गांधारी देवी की ओर देख सके?' | mahabharat अध्याय 9.63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वीर! अब मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि इन्हें प्रसन्न करने का कार्य ही उचित है। पुरुषोत्तम! आपके अतिरिक्त और कौन है जो पुत्रों के वियोग के शोक से दुर्बल होकर क्रोध से लाल नेत्रों वाली बैठी हुई गांधारी देवी की ओर देख सके?'
‘Valiant! Now it seems to me that the task of pleasing her is the right one. Purushottam! Who else other than you is there who, weakened by the grief of losing his sons, can look at Gandhari Devi who is sitting with her eyes red with anger? 25 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥