श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  9.63.24 
सा हि नित्यं महाभागा तपसोग्रेण कर्शिता।
पुत्रपौत्रवधं श्रुत्वा ध्रुवं न: सम्प्रधक्ष्यति॥ २४॥
 
 
अनुवाद
महाभागा गांधारी प्रतिदिन घोर तप करके अपने शरीर को दुर्बल कर रही हैं। जब वे सुनेंगी कि हमारे पुत्र और पौत्र मारे गए हैं, तो वे अवश्य ही हमें जला डालेंगी॥ 24॥
 
‘Mahabhaga Gandhari is weakening her body by intense penance every day. She will surely burn us when she hears that our sons and grandsons have been killed.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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