श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  9.63.20-21 
गदाप्रहारा विपुला: परिघैश्चापि ताडनम्।
शक्तिभिर्भिन्दिपालैश्च तोमरै: सपरश्वधै:॥ २०॥
अस्मत्कृते त्वया कृष्ण वाच: सुपरुषा: श्रुता:।
शस्त्राणां च निपाता वै वज्रस्पर्शोपमा रणे॥ २१॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण! हमारे लिए आपने अनेक गदाओं के प्रहार सहे, परिघों के प्रहार सहे, शक्ति, भिन्दिपाल, तोमर और कुल्हाड़ियों के प्रहार सहे और अनेक कठोर वचन सुने। रणभूमि में आप पर ऐसे-ऐसे अस्त्र-शस्त्रों का प्रहार हुआ जिनका स्पर्श वज्र के समान था।'
 
‘Sri Krishna! For our sake you bore many blows of maces, got hit by Parighans, endured blows of Shakti, Bhindipal, Tomar and axes and heard many harsh words. You were attacked by such weapons in the battlefield whose touch was like thunderbolt.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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