श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  9.63.15 
तव प्रसादाद् गोविन्द राज्यं निहतकण्टकम्।
अप्राप्यं मनसापीदं प्राप्तमस्माभिरच्युत॥ १५॥
 
 
अनुवाद
गोविन्द! अच्युत! यह अखण्ड राज्य जो मन से भी प्राप्त करना असम्भव था, आपकी कृपा से हमें प्राप्त हो गया है॥ 15॥
 
Govind! Achyuta! This uninterrupted kingdom which was impossible to obtain even by the mind, has been obtained by us by your grace.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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