श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  9.63.14 
एवं विचिन्त्य बहुधा भयशोकसमन्वित:।
वासुदेवमिदं वाक्यं धर्मराजोऽभ्यभाषत॥ १४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अनेक प्रकार से विचार करके धर्मराज युधिष्ठिर भय और शोक में डूब गए और वसुदेवनन्दन भगवान श्रीकृष्ण से बोले-॥14॥
 
Thus, after thinking in many ways, Dharmaraja Yudhishthir got drowned in fear and grief and Vasudevanandan said to Lord Krishna -॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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