श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  9.63.13 
कथं दु:खमिदं तीव्रं गान्धारी सा सहिष्यति।
श्रुत्वा विनिहतं पुत्रं छलेनाजिह्मयोधिनम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उसका पुत्र युद्ध में सहजता से लड़ रहा था; किन्तु छल से मारा गया। यह सुनकर देवी गांधारी इस तीव्र दुःख को कैसे सहन करेंगी?॥13॥
 
Her son was fighting the battle with ease; but was killed by deceit. How will Goddess Gandhari bear this intense sorrow on hearing this?॥13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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