श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  9.63.12 
सा हि पुत्रवधं श्रुत्वा कृतमस्माभिरीदृशम्।
मानसेनाग्निना क्रुद्धा भस्मसान्न: करिष्यति॥ १२॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर कि हमने अपने पुत्र को इस प्रकार मार डाला है, वह क्रोधित हो जाएगी और अपनी इच्छा से उत्पन्न अग्नि से हमें भस्म कर देगी ॥12॥
 
Hearing that we have killed our son in this manner, she will become enraged and will consume us with the fire generated by her will. ॥12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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