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mahabharat 9.63.11: इस प्रकार सोचते-सोचते राजा युधिष्ठिर के मन में विचार आया कि सबसे पहले क्रोध से जल रही देवी गांधारी को शांत करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 9.63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरकी प्रेरणासे श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें जाकर धृतराष्ट्र और गान्धारीको आश्वासन दे पुन: पाण्डवोंके पास लौट आना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  9.63.11 
तस्य चिन्तयमानस्य बुद्धि: समभवत् तदा।
गान्धार्या: क्रोधदीप्ताया: पूर्वं प्रशमनं भवेत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सोचते-सोचते राजा युधिष्ठिर के मन में विचार आया कि सबसे पहले क्रोध से जल रही देवी गांधारी को शांत करना चाहिए।
 
While thinking in this manner, the thought came to King Yudhishthira's mind that first he should pacify Goddess Gandhari who was burning with anger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)