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mahabharat 9.62.44-45h: जब भगवान श्रीकृष्ण शैब्य और सुग्रीव नामक घोड़ों को अपने वाहन के रूप में लेकर विदा हो रहे थे, तब पाण्डवों ने उनसे पुनः कहा - 'हे प्रभु! यशस्वी गान्धारी देवी के पुत्र मारे गए हैं; अतः आप इस दुःखी माता को सांत्वना दीजिए।'   |   mahabharat अध्याय 9.62: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका भगवान् श्रीकृष्णको हस्तिनापुर भेजना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 62: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका भगवान् श्रीकृष्णको हस्तिनापुर भेजना  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  9.62.44-45h 
तमूचु: सम्प्रयास्यन्तं शैब्यसुग्रीववाहनम्॥ ४४॥
प्रत्याश्वासय गान्धारीं हतपुत्रां यशस्विनीम्।
 
 
अनुवाद
जब भगवान श्रीकृष्ण शैब्य और सुग्रीव नामक घोड़ों को अपने वाहन के रूप में लेकर विदा हो रहे थे, तब पाण्डवों ने उनसे पुनः कहा - 'हे प्रभु! यशस्वी गान्धारी देवी के पुत्र मारे गए हैं; अतः आप इस दुःखी माता को सांत्वना दीजिए।'
 
When Lord Krishna was leaving with the horses named Shaibya and Sugreeva as his vehicles, the Pandavas again said to him - 'O Lord! The sons of the glorious Gandhari Devi have been killed; therefore, please console the distressed mother.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)