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mahabharat 9.62.40-41h: तब राजा युधिष्ठिर ने उचित कार्य सोचकर कहा, 'हे शत्रुनाश करने वाले माधव! यह उचित प्रतीत होता है कि आप क्रोध से जलती हुई गांधारी देवी को शांत करने के लिए एक बार हस्तिनापुर जाएँ।   |   mahabharat अध्याय 9.62: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका भगवान् श्रीकृष्णको हस्तिनापुर भेजना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 62: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका भगवान् श्रीकृष्णको हस्तिनापुर भेजना  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  9.62.40-41h 
युधिष्ठिरस्ततो राजा प्राप्तकालमचिन्तयत्।
तत्र ते गमनं प्राप्तं रोचते तव माधव॥ ४०॥
गान्धार्या: क्रोधदीप्ताया: प्रशमार्थमरिंदम।
 
 
अनुवाद
तब राजा युधिष्ठिर ने उचित कार्य सोचकर कहा, 'हे शत्रुनाश करने वाले माधव! यह उचित प्रतीत होता है कि आप क्रोध से जलती हुई गांधारी देवी को शांत करने के लिए एक बार हस्तिनापुर जाएँ।
 
Then King Yudhishthira thought about the appropriate action and said, 'O enemy-destroyer Madhava! It seems appropriate that you go to Hastinapur once to pacify Gandhari Devi who is burning with anger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)