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mahabharat 9.62.37: महाराज! तत्पश्चात् महाबली वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण ने कहा - 'आज रात को हमें अपने कल्याण के लिए शिविर से बाहर ही रहना चाहिए।' 37॥   |   mahabharat अध्याय 9.62: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका भगवान् श्रीकृष्णको हस्तिनापुर भेजना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 62: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका भगवान् श्रीकृष्णको हस्तिनापुर भेजना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  9.62.37 
अथाब्रवीन्महाराज वासुदेवो महायशा:।
अस्माभिर्मङ्गलार्थाय वस्तव्यं शिबिराद् बहि:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! तत्पश्चात् महाबली वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण ने कहा - 'आज रात को हमें अपने कल्याण के लिए शिविर से बाहर ही रहना चाहिए।' 37॥
 
Maharaj! Thereafter, the great Vasudevanandan Shri Krishna said - 'Tonight we should stay out of the camp for our well being.' 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)