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mahabharat 9.62.33-34: चाँदी, सोना, मोती, बहुमूल्य रत्न, उत्तम आभूषण, कम्बल, मृगचर्म, असंख्य दास-दासियाँ और बहुत-सी राजसी वस्तुएँ उसके अधिकार में आ गईं ॥33-34॥   |   mahabharat अध्याय 9.62: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका भगवान् श्रीकृष्णको हस्तिनापुर भेजना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 62: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका भगवान् श्रीकृष्णको हस्तिनापुर भेजना  »  श्लोक 33-34
 
 
श्लोक  9.62.33-34 
रजतं जातरूपं च मणीनथ च मौक्तिकान्॥ ३३॥
भूषणान्यथ मुख्यानि कम्बलान्यजिनानि च।
दासीदासमसंख्येयं राज्योपकरणानि च॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
चाँदी, सोना, मोती, बहुमूल्य रत्न, उत्तम आभूषण, कम्बल, मृगचर्म, असंख्य दास-दासियाँ और बहुत-सी राजसी वस्तुएँ उसके अधिकार में आ गईं ॥33-34॥
 
Silver, gold, pearls, precious stones, fine ornaments, blankets, deerskin, innumerable slaves and many royal goods came into his possession. ॥33-34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)