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mahabharat 9.62.28-29h: युधिष्ठिर ने कहा- शत्रुमर्दन श्रीकृष्ण! द्रोणाचार्य और कर्ण ने जो ब्रह्मास्त्र चलाया था, उसे आपके अतिरिक्त और कौन सहन कर सकता था? वज्रधारी इन्द्र भी उसका प्रहार सहन नहीं कर सके। 28 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.62: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका भगवान् श्रीकृष्णको हस्तिनापुर भेजना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 62: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका भगवान् श्रीकृष्णको हस्तिनापुर भेजना  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  9.62.28-29h 
युधिष्ठिर उवाच
प्रमुक्तं द्रोणकर्णाभ्यां ब्रह्मास्त्रमरिमर्दन॥ २८॥
कस्त्वदन्य: सहेत् साक्षादपि वज्री पुरंदर:।
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा- शत्रुमर्दन श्रीकृष्ण! द्रोणाचार्य और कर्ण ने जो ब्रह्मास्त्र चलाया था, उसे आपके अतिरिक्त और कौन सहन कर सकता था? वज्रधारी इन्द्र भी उसका प्रहार सहन नहीं कर सके। 28 1/2॥
 
Yudhishthir said- Shatrumardan Shri Krishna! Apart from you, who else could have endured the Brahmastra that Dronacharya and Karna had used? Even Indra, wielding the thunderbolt, could not bear its blow. 28 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)