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mahabharat 9.62.25-27h: आपके ऐसा कहने पर मैंने ‘तथास्तु’ कहकर उस आदेश को स्वीकार कर लिया। हे राजन! आपके वीर, सत्यवादी और पराक्रमी भाई सव्यसाची अर्जुन मेरे द्वारा रक्षित होकर विजयी हुए हैं और अपने भाइयों सहित योद्धाओं का नाश करने वाले इस रोमांचकारी युद्ध में बच गए हैं।॥25-26 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.62: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका भगवान् श्रीकृष्णको हस्तिनापुर भेजना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 62: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका भगवान् श्रीकृष्णको हस्तिनापुर भेजना  »  श्लोक 25-27h
 
 
श्लोक  9.62.25-27h 
तव चैव ब्रुवाणस्य तथेत्येवाहमब्रुवम्॥ २५॥
स सव्यसाची गुप्तस्ते विजयी च जनेश्वर।
भ्रातृभि: सह राजेन्द्र शूर: सत्यपराक्रम:॥ २६॥
मुक्तो वीरक्षयादस्मात् संग्रामाल्लोमहर्षणात्।
 
 
अनुवाद
आपके ऐसा कहने पर मैंने ‘तथास्तु’ कहकर उस आदेश को स्वीकार कर लिया। हे राजन! आपके वीर, सत्यवादी और पराक्रमी भाई सव्यसाची अर्जुन मेरे द्वारा रक्षित होकर विजयी हुए हैं और अपने भाइयों सहित योद्धाओं का नाश करने वाले इस रोमांचकारी युद्ध में बच गए हैं।॥25-26 1/2॥
 
‘When you said so, I accepted that order by saying ‘Tathastu’. O King! Your valiant, truthful and valiant brother Savyasachi Arjuna has been protected by me and has been victorious and has survived this thrilling battle that destroys warriors along with his brothers.’॥ 25-26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)