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mahabharat 9.62.23-25h: भरतनन्दन! अब जो भी कार्य आपके लिए है, उसे शीघ्र पूरा कीजिए। पूर्वकाल में जब मैं गाण्डीवधारी अर्जुन के साथ उपलव्य नगर में आया था, तब आपने मुझे मधुपर्क प्रदान किया था और मुझसे कहा था, 'श्रीकृष्ण! यह अर्जुन आपका भाई और मित्र है। प्रभु! महाबाहो! आप इसकी सभी संकटों से रक्षा कीजिए।'॥23-24 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.62: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका भगवान् श्रीकृष्णको हस्तिनापुर भेजना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 62: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका भगवान् श्रीकृष्णको हस्तिनापुर भेजना  »  श्लोक 23-25h
 
 
श्लोक  9.62.23-25h 
क्षिप्रमुत्तरकालानि कुरु कार्याणि भारत।
उपायातमुपप्लव्यं सह गाण्डीवधन्वना॥ २३॥
आनीय मधुपर्कं मां यत् पुरा त्वमवोचथा:।
एष भ्राता सखा चैव तव कृष्ण धनंजय:॥ २४॥
रक्षितव्यो महाबाहो सर्वास्वापत्स्विति प्रभो।
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! अब जो भी कार्य आपके लिए है, उसे शीघ्र पूरा कीजिए। पूर्वकाल में जब मैं गाण्डीवधारी अर्जुन के साथ उपलव्य नगर में आया था, तब आपने मुझे मधुपर्क प्रदान किया था और मुझसे कहा था, 'श्रीकृष्ण! यह अर्जुन आपका भाई और मित्र है। प्रभु! महाबाहो! आप इसकी सभी संकटों से रक्षा कीजिए।'॥23-24 1/2॥
 
‘Bharatanandan! Now whatever work is due to you, complete it quickly. Earlier, when I had come to Upalavya city with Gandivadhari Arjun, you had offered Madhupark to me and told me this, ‘Shri Krishna! This Arjun is your brother and friend. Prabhu! Mahabaho! You should protect him from all dangers.’॥ 23-24 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)