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mahabharat 9.62.19: हे कुन्तीपुत्र! आज जब तुमने अपना अभीष्ट कार्य पूरा कर लिया है, तब मैंने उसे त्याग दिया है; अतः ब्रह्मास्त्र के तेज से पहले से ही प्रज्वलित यह रथ अब टूटकर बिखर गया है॥19॥   |   mahabharat अध्याय 9.62: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका भगवान् श्रीकृष्णको हस्तिनापुर भेजना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 62: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका भगवान् श्रीकृष्णको हस्तिनापुर भेजना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  9.62.19 
इदानीं तु विशीर्णोऽयं दग्धो ब्रह्मास्त्रतेजसा।
मया विमुक्त: कौन्तेय त्वय्यद्य कृतकर्मणि॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! आज जब तुमने अपना अभीष्ट कार्य पूरा कर लिया है, तब मैंने उसे त्याग दिया है; अतः ब्रह्मास्त्र के तेज से पहले से ही प्रज्वलित यह रथ अब टूटकर बिखर गया है॥19॥
 
O son of Kunti! Today when you have accomplished your desired task, I have left it; therefore this chariot, already ablaze by the brilliance of the Brahmastra, has now fallen apart.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)