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mahabharat 9.62.18: श्रीकृष्ण बोले - हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले अर्जुन! यह रथ अनेक प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से पहले ही जला हुआ था; किन्तु मेरे इसमें बैठे होने के कारण यह जलकर युद्धभूमि में नहीं गिरा।   |   mahabharat अध्याय 9.62: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका भगवान् श्रीकृष्णको हस्तिनापुर भेजना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 62: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका भगवान् श्रीकृष्णको हस्तिनापुर भेजना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  9.62.18 
वासुदेव उवाच
अस्त्रैर्बहुविधैर्दग्ध: पूर्वमेवायमर्जुन।
मदधिष्ठितत्वात् समरे न विशीर्ण: परंतप॥ १८॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण बोले - हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले अर्जुन! यह रथ अनेक प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से पहले ही जला हुआ था; किन्तु मेरे इसमें बैठे होने के कारण यह जलकर युद्धभूमि में नहीं गिरा।
 
Shri Krishna said - O Arjuna, the tormentor of enemies! This chariot had already been burnt by various types of weapons; but because I was sitting in it, it did not get burnt and fall in the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)