Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.62.15-17: प्रभु! नरेश्वर! उस रथ को भस्म हुआ देखकर सब पाण्डवों को बड़ा आश्चर्य हुआ और अर्जुन ने भी हाथ जोड़कर प्रभु के चरणों में बार-बार प्रणाम किया और प्रेमपूर्वक पूछा - 'गोविन्द! इस रथ में अचानक आग कैसे लग गई? प्रभु! यदुनन्दन! यह कैसा महान आश्चर्य हो गया? महाबाहु! यदि आप इसे सुनने योग्य समझते हैं, तो इसका रहस्य मुझसे कहिए।' | mahabharat अध्याय 9.62: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका भगवान् श्रीकृष्णको हस्तिनापुर भेजना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रभु! नरेश्वर! उस रथ को भस्म हुआ देखकर सब पाण्डवों को बड़ा आश्चर्य हुआ और अर्जुन ने भी हाथ जोड़कर प्रभु के चरणों में बार-बार प्रणाम किया और प्रेमपूर्वक पूछा - 'गोविन्द! इस रथ में अचानक आग कैसे लग गई? प्रभु! यदुनन्दन! यह कैसा महान आश्चर्य हो गया? महाबाहु! यदि आप इसे सुनने योग्य समझते हैं, तो इसका रहस्य मुझसे कहिए।'
Lord! Nareshwar! Seeing that chariot reduced to ashes, all the Pandavas were surprised and Arjun also bowed repeatedly at the feet of the Lord with folded hands and asked lovingly - 'Govind! How did this chariot suddenly catch fire? Lord! Yadunandan! What a great surprise this has become? Great arms! If you consider it worth listening to, then tell me its secret. 15-17
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥