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mahabharat 9.61.d6: देवताओं की राय जानकर तथा उन्हें प्रसन्न करने और उनका कल्याण करने की इच्छा से मैंने महानागास्त्र को अर्जुन पर नहीं लगने दिया। मैंने उसे विफल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक d6
 
 
श्लोक  9.61.d6 
देवानां मतमाज्ञाय तेषां प्रियहितेप्सया।
नार्जुनस्य महानागं मया व्यंसितमस्त्रजम्॥
 
 
अनुवाद
देवताओं की राय जानकर तथा उन्हें प्रसन्न करने और उनका कल्याण करने की इच्छा से मैंने महानागास्त्र को अर्जुन पर नहीं लगने दिया। मैंने उसे विफल कर दिया।
 
Knowing the opinion of the Gods and with the desire to please them and to do good to them, I did not let the Mahanaagastra hit Arjun. I foiled it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)