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mahabharat 9.61.d3: विद्वान सत्यवंशी सत्य ने अपनी सच्ची प्रतिज्ञा पूरी करने की इच्छा से समरांगण में अपने शत्रु महायोद्धा भूरिश्रवा का वध कर दिया था।   |   mahabharat अध्याय 9.61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  9.61.d3 
प्रतिज्ञामात्मन: सत्यां चिकीर्षन् समरे रिपुम्।
हतवान् सात्वतो विद्वान‍् सौमदत्तिं महारथम्॥
 
 
अनुवाद
विद्वान सत्यवंशी सत्य ने अपनी सच्ची प्रतिज्ञा पूरी करने की इच्छा से समरांगण में अपने शत्रु महायोद्धा भूरिश्रवा का वध कर दिया था।
 
The learned Satyavanshi Satya, wishing to fulfill his true vow, had killed his enemy, the great warrior Bhurishrava, in Samarangana.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)