श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक d15-d16h
 
 
श्लोक  9.61.d15-d16h 
तत: शङ्खाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखा:।
पाण्डुसैन्येष्ववाद्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत्॥
अस्तुवन् पाण्डवानन्ये गीर्भिश्च स्तुतिमङ्गलै:।)
 
 
अनुवाद
उसके बाद पांडव सेना में शंख, भेरी, पणव, आनक और गोमुख आदि वाद्य बजाए गए। इन सब वाद्यों की सम्मिलित ध्वनि अत्यंत भयानक प्रतीत हो रही थी। उस समय अन्य अनेक लोग स्तुति और मंगलमय वचन बोलकर पांडवों की स्तुति करने लगे।
 
After that, musical instruments like Shankh, Bheri, Panav, Aanak and Gomukh were played in the Pandava army. The combined sound of all these instruments seemed very terrifying. At that time, many other people started praising the Pandavas by uttering praises and auspicious words.
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि कृष्णपाण्डवदुर्योधनसंवादे एकषष्टितमोऽध्याय:॥ ६१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें श्रीकृष्ण, पाण्डव और दुर्योधनका

संवादविषयक इकसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६१॥ (दाक्षिणात्य अधिक पाठके १५ श्लोक मिलाकर कुल ८६ श्लोक हैं।)
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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