श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक d12-d14
 
 
श्लोक  9.61.d12-d14 
नकुल: सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ॥
धृष्टद्युम्नस्तथा जैत्रं सात्यकिर्नन्दिवर्धनम्।
तेषां नादेन महता शङ्खानां भरतर्षभ॥
आपुपूरे नभ: सर्वं पृथिवी च चचाल ह॥
 
 
अनुवाद
नकुल और सहदेव ने क्रमशः सुघोष और मणिपुष्पक नामक शंख बजाए। धृष्टद्युम्न ने जैत्र नामक शंख की ध्वनि फैलाई और सात्यकि ने नन्दिवर्धन नामक शंख की ध्वनि फैलाई। भरतश्रेष्ठ! उन महान शंखों की ध्वनि से सारा आकाश गूंज उठा और पृथ्वी हिलने लगी।
 
Nakul and Sahadeva blew the conch shells named Sughosh and Manipushpak respectively. Dhrishtadyumna spread the sound of conch called Jaitra and Satyaki spread the sound of conch called Nandivardhana. Bharatshrestha! The sound of those great conch shells filled the entire sky and the earth began to shake.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)