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mahabharat 9.61.d11: प्रसन्नचित्त अर्जुन ने देवदत्त नामक महान शंख बजाया। चिरंजीवी कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर और भयंकर कर्म करने वाले भीमसेन ने पौण्ड्र नामक महान शंख बजाया।   |   mahabharat अध्याय 9.61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक d11
 
 
श्लोक  9.61.d11 
(देवदत्तं प्रहृष्टात्मा शङ्खप्रवरमर्जुन:।
अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:॥
पौण्ड्रं दध्मौ महाशङ्खं भीमकर्मा वृकोदर:।
 
 
अनुवाद
प्रसन्नचित्त अर्जुन ने देवदत्त नामक महान शंख बजाया। चिरंजीवी कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर और भयंकर कर्म करने वाले भीमसेन ने पौण्ड्र नामक महान शंख बजाया।
 
The happy Arjuna blew the great conch called Devadatta. King Yudhishthir, son of Kunti, who was eternally victorious and Bhimasena, who performed terrible deeds, blew the great conch called Paundra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)