Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.61.d1: भीष्म युद्धभूमि में पांडवों के विनाश की कामना करते हुए अपना पराक्रम दिखा रहे थे। उस समय शिखंडी ने अपने मित्रों के हित के लिए उनका वध कर दिया, जो न तो कोई दोष है और न ही कोई अपराध। | mahabharat अध्याय 9.61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(कुर्वाणं कर्म समरे पाण्डवानर्थकाङ्क्षिणम्।
यच्छिखण्ड्यवधीद् भीष्मं मित्रार्थे न व्यतिक्रम:॥
अनुवाद
भीष्म युद्धभूमि में पांडवों के विनाश की कामना करते हुए अपना पराक्रम दिखा रहे थे। उस समय शिखंडी ने अपने मित्रों के हित के लिए उनका वध कर दिया, जो न तो कोई दोष है और न ही कोई अपराध।
Bhishma was displaying his valour in the battlefield, wishing for the destruction of the Pandavas. At that time, Shikhandi killed him for the benefit of his friends, which is not a fault or a crime.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥