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mahabharat 9.61.66: गदाधारी धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन भी युद्ध करते हुए नहीं थकता था। दण्डधारी काल भी धर्मयुद्ध में उसे नहीं मार सकता था॥ 66॥   |   mahabharat अध्याय 9.61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 61: पाण्डव-सैनिकोंद्वारा भीमकी स्तुति, श्रीकृष्णका दुर्योधनपर आक्षेप, दुर्योधनका उत्तर तथा श्रीकृष्णके द्वारा पाण्डवोंका समाधान एवं शंखध्वनि  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  9.61.66 
तथैवायं गदापाणिर्धार्तराष्ट्रो गतक्लम:।
न शक्यो धर्मतो हन्तुं कालेनापीह दण्डिना॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
गदाधारी धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन भी युद्ध करते हुए नहीं थकता था। दण्डधारी काल भी धर्मयुद्ध में उसे नहीं मार सकता था॥ 66॥
 
‘Even Duryodhana, the son of Dhritarashtra, who held a mace, was not tired of fighting. Even Kala, who held a stick, could not kill him in a righteous war.॥ 66॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)